प्रशांत सातोसे - Piya ji

कब से चुप चाप बैठे है
देखो जी हमसे रूठे है
हमसे जो प्यार के वादे
खुद तो फितरत से झूठे है
हूँ कनखी से छुप छुप के ताके
फिर क्यों बोले ये हमसे ना
पिया जी...

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