Wahdat rameez - Mohabbat hi na jo samje

मोहब्बत ही ना जो समझे
वो ज़ालिम प्यार क्या जाने
निकलती दिल के तारो से
जो है झनकार क्या जाने
मोहब्बत ही ना जो समझे
उसे तो क़त्ल करना
और तड़पाना ही आता है
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